हाँ मैं लड़की हू

 

आरती सिंह
अध्यापिका, प्रेरणा गर्ल्स स्कूल

लड़की क्यों है , दुनिया के लिए अभिशाप ।

पैदा करके माँ ने जैसे किया कोई पाप ।

दिन -दिन मरती इक नई मौत ।

क्यों अपनी ही घर में बेटी है,इक खौफ ।

दिनिया में कहने को तो देविया बेशुमार है ।

पर लड़की हमेशा से सहती  अत्याचार है ।

बस अब बहुत हुआ लड़की है तो क्या सताओगे ?

याद रखना हम अगर जाग गये तो तुम पछ्ताओगें ।

हाँ मैं लड़की हू इसमे कोई शक नहीं ।

मुझे सताने का तुम्हे कोई हक़ नहीं ।

समाज में अगर हमें शान से रहना है ।

ज़ुल्म किसी का हमें नहीं सहना है ।

लडकियों को खुद आगे आना होगा ।

आगे बढ़कर अत्याचारों का सामना करना होगा ।

तुम सब अपने अधिकार को पहचानों ।

अबला नहीं सबला ही इस बात को मानों ।
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Joining Hands

 

Veena Anand
Executive Director,
Didi’s

“Sons of India will actually have to believe genuinely that women are their equals and treat them accordingly. Just talking and discussions will not suffice, Supporting women at all levels- at home, at the work place, in every walk of life.”
We the women of India have a greater responsibility of supporting each other in protecting the girl child at birth, educating girls, making them independent in life and joining hands to make them stronger.”
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लड़की मानो मिट्टी की गुड़िया

 

Monika,
Teacher, Prerna Girls School

मैं मर्द हूँ तुम औरत
मैं भूखा हूँ तुम भोजन
यह है हमारे समाज के पुरुषो की मानसिकता सच में विचाराधीन है हम स्त्रियों के लिये। महादेवी वर्मा की कविता मैं नीर भरी दुःख की बदली, जहाँ लड़की मानो मिट्टी की गुड़िया हो, हर मोड़ टूटने और बिखरने का डर।
हम बढ़े भी तो कैसे,इस डर की कोठरी मे रहकर, अगर पुरुषो की एक जुटता कही दिखाई देती है, तो वह है नारी के शोषण में जहाँ उम्र, धर्मं, जांति , रंग, किसी का भेद नहीं वाह रे वाह हमारा समाज ।
कहने को तो आज महिलाएं पुरुषों से कंधे से कन्धा मिलाकर चल रहीं है। लेकिन सही माइने में इसे कायम रखने के लिए उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कीमत चुकानी पड़ती है । क्या भारत में औरतो को अपने अधिकार मिल रहे है।
1. लम्बा जीवन जीने की आज़ादी
2. अच्छी सेहत का हक़
3. बिना जुर्म के काम करने की आज़ादी
4. अपने फैसले लेने की आज़ादी
5. डर से छुटकारा पाने की आज़ादी
यह सभी हुक बे मतलब हो जाते है, जब पुरुष प्रधान देश में महिलाओं की आवाज का दमन कर दिया जाता है ।
भू मण्डलीय के कारण इस युग में जब कर लो दुनिया मुटठी में का उदधोश सुनाई देता है तो हम स्वयं को किसी शिखर पर खड़ा पते है पैर सच तो यही है की आधुनिक युग में यह एक काल बनकर हमारे सिर पैर मंडरा रहा है। इस काले बदल को हटाने के लिए धर्म के नाम पर रूडिवादी संस्कार हटाने पड़ेंगे । घर में दी जाने वाली लडको को आज़ादी हटानी पड़ेगी।
महिलाओ को शिक्षित और आत्म निर्भर बनाना पड़ेगा और साथ ही साथ कुछ भ्रष्ट मंत्रियों के हाथ से देश की डोर छीननी पड़ेगी।
विडंबना यही पर ख़त्म नहीं होती पुलिस की नज़रे उनके अशलील शब्दों से भरे हुए सवाल और मीडिया की मसालेदार बाते यह तो अभिमन्यु के उस च्क्रवियु में फंसे होने से भी , गहरा, षड्यंत्कारी चक्रवियु है और सबसे बड़ी दुःख की बात तो यह है की खुली आँखों में सबको दिखाई तो देता है पर कोई देखना नहीं चाहता । नारी को एक जुट होकर अब कहना नहीं पड़ेगा ‘ मंजिल मिल ही जाएगी, भटकते हे सही गुमराह तो वह है जो घर से निकले ही नहीं।
कोई लक्ष मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं ।
हारा वही है जो लड़ा नहीं।

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सम्पूर्ण

एकता मेहरोत्रा

प्रेरणा स्कूल

ईश्वर ने रचा ममता का रूप ,
जीवन जिसका संघर्षो का प्रतिरूप ।
जब आई स्रष्टि रचना की बारी ,
तब सृष्टि रचयिता ने रच दी नारी ।
करुणा ,ममता , मर्म ह्रदय की धनी ,
जिससे इस जग की नीव बनी ।
कहते है नारी को अबला ,
पर इसने इस जग को बदला ।
पल -पल चढ़ती बलिदानों की वेदी ,
बनकर माँ ,पत्नी ,बहन ,बेटी ।
व्यक्तित्व है आशाओ से परिपूर्ण
बनता है जिससे यह जग। सम्पूर्ण ।

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लड़का लड़की एक समान दोनों को ही दो सम्मान

Anupma Mam
Teacher Vidyasthali

क्या कभी नहीं बदलेंगे
लोगों के ये बुरे विचार
क्या कभी नहीं बंद हो पाएंगे
लड़कियों पर होते अत्याचार
आओ आज हम सभी मिलकर
यह संकल्प उठायें
नारी के अधिकारों की
रक्षा करके अपना कर्तव्य निभाएं

लड़का लड़की एक सामान
दोनों को ही दो सम्मान

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बेटियाँ

Aarti Gupta
Virangana Activist Group

हम लडकियों और लड़को में अंतर क्यों करते है ?
ऐसा क्यों समझा जाता है की लड़के लडकियों से
ज्यादा काम करते है ?
क्या लडकियों को हक नहीं है की वे पैसा कमाकर या और किसी तरह से अपने
माँ- बाप का सहारा बनें ?
जन्म से ही सारे अधिकार लड़को को ही क्यों मिलते है ?लडकियों को नहीं ?
जब दोनों से मिलकर संसार चलता है तो महिला का स्थान पुरुष से इतना नीचा क्यों है?

सूरज सी हैं तेज बेटियाँ
चाँद की शीतल किरन बेटियाँ
झिलमिल तारों सी होती है !
घर की हैं सौगात बेटियाँ !

कोयल का संगीत बेटियाँ
पायल की झंकार बेटियाँ
सात सुरों की सरगम जैसी
वीणा का वरदान बेटियाँ
घर की है मुस्कान बेटियाँ
लक्ष्मी का हैं मान बेटियाँ
माँ -बापू और सारे घर की
सचमुच होती जान बेटियाँ
दुर्गा ,इंदिरा , लक्ष्मीबाई
जैसी बने महान बेटियाँ
कर्म क्षेत्र में बढने को हैं
आज सभी तैयार बेटियाँ ।

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जग की देन

Preeti Verma

Virangana, Activist Group

लड़का हुआ तो वाह! ! वाह! !धन्य हो गया यह जीवन ।

लड़की हुई तो हाय!! हाय!! बेकार हो गया मेरा जीवन |

जिसने दिया हमको खुशियों का खजाना ,उसे ही किया हमने बेगाना ।

लड़का है बुढापे का सहारा ,लड़की तो है धन पराया ।

जग की देन

जग की सबसे प्यारी देन ,

जग की सबसे न्यारी देन ,

वो हैं जग की बेटियां ,

नहीं हैं ये किसी से कम,

सबके दूर करती हैं ग़म ,

जब जब हुआ इनपर अत्याचार,

किया इन्होने उस पर प्रहार ,

मेरा है ये कहना ,

बेटियां हैं जग का गहना ,

न समझो इनको मामूली गुडिया ,

ये तो हैं हम सबकी दुनियां ,

जग की सबसे प्यारी देन ,

जग की सबसे न्यारी देन |

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नहीं सहेंगे अत्याचार

कल्पना तिवारी

महिलाएं असुरक्षित अनचाही असमान
एक बेटे के जन्म से माता पिता फूले नहीं समाते, जबकि वही एक लड़की के जन्म से माता- पिता व पूरा परिवार शोक में डूब जाता है उन्हें निराशा व जिम्मेदारी की अनुभूति होती है बेटे के जन्म से ही दहेज़ व उसकी सुरक्षा की चिंता सताने लगती है
एक बेटी अपने माता पिता के घर रह कर उनकी इज्जत व सम्मान की रक्षा करती है और ससुराल में जाकर दूसरे परिवार को जोड़कर रखती है एक दुनिया में आकर दूसरी दुनिया का निर्माण करती है वही एक बेटा दूसरी लड़की के साथ बलात्कार करके कितनी लड़कियों के साथ कितने लोगो की जिंदगी नरक बनाने का कारण बनता है फिर भी बेटियों का दर्जा लडको की अपेक्षा नीचा समझा जाता है जब की उस बेटी को जन्म देने वाली माँ भी एक लड़की होती है एक बेटी का हक है कि उसे बेटे के समान दर्ज़ा मिले उसे इज्जत भरी नजरो से देखा जाये
लडको को कोई हक नहीं कि वो लड़कियों को असहाय समझे अब वक़्त आ गया है कि लडको सबक सिखाया जाये उन्हें स्त्री शक्ति का एहसास कराया जाये हमारी बेटिया बेटों से कमज़ोर नहीं है उन्हें अपराध के खिलाफ आवाज़ उठाना आता है लड़कियों को समानता का हक उन्हें मिलना चाहिए अन्यथा वे आगामी समय में अपने हक के लिए आवाज़ उठाने में भी पीछे नहीं रहेंगी
नहीं सहेंगे अत्याचार
लड़को अब जाओ तैयार

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भेद – भाव को दिल से , जड़ तक मिटाओ

sunita singh

Veerangna Group

भेद- भाव मिटाना है तो दिल से जुट जाओ।
लड़की- लड़का बराबर है, कह- कह के न छुपाओ ।
गर्भ में बेटी है तो, उसको न मिटाओ ।
आने दो संसार में और हौसला बढाओ।
बेटे को इंजिनियर तो, बेटी को डॉक्टर बनाओ ।
दोनों में भेद करके नाक न कटाओ ।
बुढ़ापे की लाठी सोच कर, सर पर न बैठाओ ।
बन सकता है, एक अच्छा इन्सान राक्षस न बनाओ ।
माँ- बाप हो , कर्तव्य भी बताओ ।
भेद – भाव को दिल से , जड़ तक मिटाओ ।।

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इज्जत

पूनम मौर्या 
Virangana Activist Group
 इज्जत है सबकी शान
इस पर न आती कोई आन
पढ़-लिखकर हम बने महान
इससे बढ़े माँ- बाप की शान
                                                    बेटियों को न समझो फूटी तक़दीर
                                                    ये होती है तुम्हारी कल की तस्वीर
                                                     बाँधकर इज्जत की पगड़ी
                                                     न करो कोई अफत खड़ी
जो बाँधे इज्जत की डोर
उसको करते है सब कमजोर
बेटी-बेटे में न भेद करो
अपने दिल में न खेद करो
                                                     बेटी को तुम अवसर दो
                                                    बढने का तुम मौका दो
                                                     ये बढाये तुमारी शान
                                                      इनपे करो तुम अभिमान

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